महिला वीरांगना फूलनदेवी की शहादत दिवस पर नमन

जाति और मर्द की सत्ता को एक चुनौती देने वाली,महिला सशक्तिकरण की नायाब मिशाल,तत्कालीन सांसद वीरांगना फूलन देवी के शहादत दिवस पर शत्-शत् नमन एंव विनम्र श्रद्धांजलि। वही फूलन,जो तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण की नज़र में ‘अन्याय के प्रतिकार का प्रतीक’ है।

संघर्ष की मशाल, बहुजन वीरांगना फूलन देवी को प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने इतिहास की 16 सबसे विद्रोही महिलाओं की सूची में चौथे नंबर पर रखा है।

कभी चंबल के बीहड़ों पर राज करने वाली वीरांगना फूलन देवी को प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने इतिहास की 16 सबसे विद्रोही महिलाओं की सूची में चौथे नंबर पर रखा है।
भारत से वे अकेली ही इस लिस्ट में हैं। इस लिस्ट में जॉन ऑफ आर्क से लेकर आंग सान सूकी तक कुल 17 नाम हैं।

मैगजीन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर जारी लिस्ट में दिवंगत फूलनदेवी के बारे में लिखा है, उन्हें भारतीय गरीबों के संघर्ष को आवाज देने वाली शख्सियत थी।
उनके साहस को जितना सराहा जाये उतना कम है, निश्चय ही फूलन देवी का सारा जीवन ही संघर्ष और साहस की मिसाल है। सभी को खासकर महिलाओं को उनके जीवन से प्रेरण लेनी चाहिए ।अमेरिका से लेकर ब्रिटेन में फूलन देवी का सम्मान होता रहा है। टाइम मैगजीन से लेकर गार्डियन तक में उनके नाम का डंका बज चुका है ।सारी दुनिया विश्व इतिहास की श्रेष्ठ विद्रोहिणी के तौर पर फूलन को सलाम करती है। दुनिया की सबसे लोकप्रिय ‘टाइम’ मैगजीन की नज़र में फूलन देवी श्रेष्ठ है। लंदन का जो ‘गार्डियन’ अखबार भारत के प्रधानमंत्री के मरने पर पर स्मृति लेख नहीं छापता, उसने फूलन पर स्मृति लेख छापा था ।

साथियों मान्यवर कांशीराम साहब जी ने 1981 में 34 वें स्वतंत्रता दिवस को फूलन देवी वर्ष मनाया था. मान्यवर कांशीराम ने फूलन देवी के नाम पर एक पूरे साल का नाम रखा था। वहीं, नेताजी मुलायम सिंह यादव जी ने फूलन को संसद भेजा और परिवार की सदस्य की तरह उनकी अर्थी को कंधा दिया।


साथियों डी एस ४ के बैनर तले फूलन देवी को पहली बार चुनावी राजनीति में उतारने वाले मां कांशीराम साहब और बहन मायावती जी थी।

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